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होली पूजन की सही विधि

होली दो दिन का त्यौहार है. पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन रंग वाली होली खेली जाती है. होली पूजा होली के प्रथम दिन होलिका दहन से पहले की जाती है. यही दिन वास्तव मे होली का दिन होता है. द्वीतीय दिन, जब होली खेली जाती है, उस दिन को धुलंडी कहा जाता है. होली या होलिका दहन वाले दिन पूजा करना शुभ होता है. ऐसा मन जाता है कि होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा करने से सुख-समृद्धि और धन-सम्पदा की प्राप्ति होती है. ये भी मन जाता है की होली पूजा करने से मनुष्य हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है.
आइये जानते हैं होली की पूजा कैसे करें.

होली की पूजा कब और कैसे की जाती है?

होली की पूजा होलिका दहन से ठीक पहले की जाती है. यह पूजा कहीं भी की जा सकती है. आमतौर पर लोग इस पूजा को सामुदायिक तौर पर एक साथ करते हैं. हर गली मोहल्ले में होली के कई दिन पहले से किसी सार्वजनिक स्थान पर लकड़ियाँ, सुखी पत्तियां, पेड़ की डालियाँ, गोबर के कंडे इत्यादि सामग्री जमा किया जाना शुरू हो जाता है. यह ढेर एक मजबूत लकड़ी के आसपास इकठ्ठा किया जाता है और इसे होलिका नाम से बुलाया जाता है. होलिका दहन वाले दिन इसे जलाने से पहले इसकी पूजा की जाती है. होलिका दहन के बाद जो राख बचती है, लोग उसे घर ले जाते हैं और दूसरे दिन इस राख को अपने शरीर पर मलते हैं. ऐसा करना शुभ माना जाता है. कहते हैं ऐसा करने से शरीर पवित्र होता है. इसके बाद सब रंग और अबीर से होली खेलते हैं.

होली की पूजा विधि

सर्वप्रथम निम्न पूजा सामग्री जमा करें:
  • एक कलश या बर्तन में पानी
  • गोबर के कंडे या गोबर
  • रोली (पूजा कुमकुम, सिन्दूर)
  • अक्षत (वह चावल जो टूटा हुआ ना हो, साबुत हो )
  • धूप, अगरबत्ती इत्यादि सुगन्धित पूजा सामग्री
  • फूल मालाएं
  • मोली (पवित्र धागा)
  • कच्ची हल्दी की गांठे
  • साबूत मूंग की दाल
  • बताशे
  • नारियल
  • गुलाल
  • एक सीधा डंडा

घर पर होली पूजा की विधि

जब आप घर पर ही होली की पूजा करें तो निम्नलिखित पूजा विधि अपनाएं
  • गोबर के कंडों से मालाएं बना लें. गोबर से और भी खिलोने बनायें जैसे ढाल, तलवार, सूरज, चाँद, इत्यादि. एक खिलौना होलिका के प्रतिरूप का भी बनायें.
  • घर में जिस जगह पर पूजा की जानी हो, वह जगह पानी से धोकर गोबर का चौका लगायें
  • चौका लग जाने के बाद एक सीधा डंडा लें और उसे चौके पर स्थापित करें
  • इस डंडे के चारों तरफ गोबर के कंडों से बनायीं मालाएं लगा दे. इन मालाओं को बढ़कुला और गुलरी भी कहा जाता है
  • इन मालाओं के आसपास गोबर से बनी ढाल, तलवार, और बाकी सारे खिलौनें भी रख दें
  • अब आप पूजा के लिए तैयार हैं. होली पूजन मुहूर्त के समय तैयार की गयी होलिका की पूजा करें
  • होली पूजा के समय सारी पूजन सामग्री एक पूजा थाली में सजा लें – फूल, धूप, अगरबत्ती, रोली, मोली, अक्षत – सभी कुछ थाल में रखें. पानी को एक पूजा घट (लोटे) में रख लें.
  • सबसे पहले गणेश, विष्णु और आप जिन देवी देवताओं को मानतें हैं, उनकी पूजा करें. इसके लिए पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख कर के बैठें और हाथ जोड़ कर इन देवताओं का ध्यान करें, मंत्र जाप भी कर सकतें हैं.

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