मौत के मुह से होकर जाता है इस किले का रास्ता
रायगढ़ एक ऐतिहासिक जगह है जो कि मुंबई के ठीक दक्षिण में मौजूद है। ये जगह मुंबई से लगभग 210 किमी दूर स्थित है, रायगढ़ का किला 5.12 वर्ग किमी में फैला हुआ है। ये जगह कोंकण समुद्रतटीय मैदान का हिस्सा है और यहां आड़ी-तिरछी पहाड़ियां स्थित हैं। रायगढ़ पहुंचने का सिर्फ एक ही रास्ता है और इस रास्ते को बनाने के पीछे शिवाजी का उद्देश्य रहा होगा कि उनके अपने तो यहां पहुंच जाएं, लेकिन दुश्मन किले के अंदर आसानी से नहीं पहुंच पाएं।
ये किला 1350 मीटर ऊंचाई पर स्थित है जहां जाने के लिए 1400-1450 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं, लेकिन अब रोपवे के माध्यम से इस किले तक पहुंचा जा सकता है। इस किले में जाने के लिए कई दरवाजें थे। इनमें से एक नगरखाना दरवाजा था, जिससे आम लोग प्रवेश करते थे। दूसरा मीना दरवाजा जिससे महिलाएं प्रवेश करती थीं, ये दरवाजा सीधा रानी के महल को ओर जाता था। तीसरा पालकी दरवाजा, जिससे राजा तथा उनका दल प्रवेश करता था। इसी के साथ महल का मुख्य दरवाजा महा दरवाजा था। इस किले में एक गंगासागर झील भी है, जिसमें उस समय गंगा नदी का पानी लाकर डाला गया था। शिवाजी के बाद 1689 ई तक इस किले पर संभाजी का शासन रहा, जिसके बाद इस किले पर मुगलों का कब्जा हो गया। 1818 ई में रायगढ़ पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था।

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